HomeNationalSBI ने कोर्ट को सौंपी चुनावी चंदे की जानकारी

SBI ने कोर्ट को सौंपी चुनावी चंदे की जानकारी

नर्ई दिल्‍ली।भारत के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने इलेक्ट्रोरल बांड (चुनावी चंदे) की पूरी जानकारी भारत के निर्वाचन आयोग (चुनाव आयोग) को सौंप दी है। अब चुनाव आयोग इलेक्ट्रोल बांड की पूरी जानकारी अपनी वेबसाइट पर अपलोड करके आम जनता के लिए उपलब्ध कराएगी। यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही चलाई जा रही है।

बुधवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविड (हल्पनामा) दाखिल किया है। इस विषय में साने आई मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि एसबीआई के सीएमडी दिनेश खारा ने सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उन्होंने कोर्ट के आदेशों का पालन किया है. एसबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड की खरीद और बिक्री, इसके खरीदार के नाम समेत सभी संबंधित जानकारी को लेकर रिपोर्ट तैयार की है और इसे समय रहते आयोग को मुहैया करा दिया गया है।

एसबीआई ने अपने हलफनामे में कहा है कि बैंक ने सीलबंद लिफाफे में एक पेनड्राइव और दो पीडीएफ फाइल के जरिए सामग्री सौंपी है, जो पासवर्ड से संरक्षित हैं। जिस इलेक्टोरल बॉन्ड का भुगतान किसी पार्टी को नहीं हो पाया है।. उसकी रकम पीएम रिलीफ फंड में जमा कर दी गई है। इस हलफनामे में बैंक ने आंकड़ों के जरिए बताया है कि पहली अप्रैल 2019 के बाद से 15 फरवरी 2024 तक कुल 22217 इलेक्टोरल बॉन्ड्स बिके हैं। इनमें से 22030 भुना लिए गए हैं। इनमे से 187 का भुगतान नहीं लिया गया है. जाहिर है कि नियमों के मुताबिक वो पीएम रिलीफ फंड में जमा कर दिए गए हैं। बता दें कि इससे पहले एसबीआई ने इलेक्टोरल बॉन्ड (Electoral Bond) से जुड़ी जानकारी साझा करने की समयसीमा 30 जून तक बढ़ाए जाने की सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी। लेकिन कोर्ट ने एसबीआई की मांग को खारिज कर दिया था और उसे 12 मार्च तक सारी डिटेल चुनाव आयोग के समक्ष साझा करने को कहा था।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने लेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए रद्द कर दिया था. साथ ही एसबीआई से 6 मार्च तक सारी डिटेल चुनाव आयोग के पास जमा करने को कहा था। इस पर एसबीआई ने 30 जून तक का समय मांगा था। सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने एसबीआई की मांग को खारिज करते हुए 12 मार्च तक सारी डिटेल चुनाव आयोग को देने का आदेश दिया है। साथ ही चुनाव आयोग को ये सारी डिटेल 15 मार्च की शाम 5 बजे तक वेबसाइट पर अपलोड करने को कहा है।

साल 2017 में केंद्र सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम की घोषणा की थी. इसे 29 जनवरी 2018 को कानूनी रूप से लागू किया गया था। सरकार का कहना था कि चुनावी चंदे में ‘साफ-सुथरा’ धन लाने और ‘पारदर्शिता’ बढ़ाने के लिए इस स्कीम को लाया गया है। एसबीआई की 29 ब्रांचों से अलग-अलग रकम के इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए जाते हैं। ये रकम एक हजार से लेकर एक करोड़ रुपये तक हो सकती है। इसे कोई भी खरीद सकता है और अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को दे सकता है।

 

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