HomeReligionधनतेरस आस्था का अलौकिक त्योहार

धनतेरस आस्था का अलौकिक त्योहार

हिंदू धर्म पुराणों के अनुसार दिपावली से दो दिन पहले कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि पर मनाने वाले त्योहार को धनतेस के नाम से जाना जाता है। इस बार यह त्योहार 10 नवंबर दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। पुराणों के अनुसार धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी से संबंधित कोई खास वस्तु जैसे सोना, चांदी,पीतल से बने सामान खरीदने की परंपरा आदि काल से चली आ रही हैं।

लोगों का मानना है कि धनतेरस के दिन समुद्र मंथन का कार्य चल रहा था  मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस के दिन जो सामान खरीदते हैं उससे घर में लक्ष्मी का प्रवेश होता है। मां लक्ष्मी धन की द्योतक हैं साथ ही घर में धन कुबेर का भी आगमन होता है। इस दिन लोग नए बर्तन और आभूषण खरीदते हैं और घर के द्वार पर दीपक जलाते हैं। इस पर्व अनेक प्रचलित कथाएं भी है।

एक बार हेम नाम का राजा था और उनका एक पुत्र था। जब बालक की कुंडली बनी तो ज्योतिषियों ने कहा कि बालक का विवाह जिस दिन होगा उसके ठीक चार दिन के बाद उसकी मौत हो जाएगी। राजा इस बात को जानकर बहुत दुखी हुआ और राजकुमार को ऐसी जगह पर भेज दिया जहां कोई लड़की उसे ना दिखे।

लेकिन एक बार एक राजकुमारी उधर से गुजरी और दोनों एक दूसरे को देखकर मोहित हो गये और उन्होंने गन्धर्व विवाह कर लिया। विवाह के बाद ठीक वैसा ही हुआ और चार दिन बाद  यमदूत उस राजकुमार के प्राण लेने आ पहुंचे। जब यमदूत उसको ले जा रहे थे तो उसकी पत्नी ने काफी विलाप किया। लेकिन यमदूतों को अपना काम तो करना ही था।

नवविवाहिता के विलाप को सुनकर यमदूतों ने यमराज से विनती की हे यमराज क्या कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे मनुष्य अकाल मृत्यु से मुक्त हो जाए। यमदेवता बोले हे दूत अकाल मृत्यु तो कर्म की गति है। इससे मुक्ति का एक आसान तरीका मैं तुम्हें बताता हूं । कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी रात जो प्राणी मेरे नाम से पूजन करके दीप माला दक्षिण दिशा की ओर भेट करता है। उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। यही कारण है कि लोग इस दिन घर से बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाकर रखते हैं।

एक बार लक्ष्मी मां भगवान विष्णु के साथ विचरण कर रही थीं। एक जगह पर भगवान ने लक्ष्मी मां को कहा कि आप यहीं रुकें और जब तक मैं वापस ना आऊं आप यहीं रहना। मां लक्ष्मी का मन व्याकुल हो गया और वो भी विष्णु जी के पीछे दक्षिण दिशा की तरफ जाने लगी। आगे जाकर सरसों के खेत आए। खेतों में लहलहाती सरसों बहुत ही सुंदर लग रही थी। लक्ष्मी मां ने एक फूल तोड़ा और श्रृंगार किया आगे जाकर गन्ने के खेत आए तो उन्होंने गन्ने के रसीले मीठे रस का आनंद लिया।तभी भगवान विष्णु वहां आ गए और मां लक्ष्मी से नाराज हो गए।

विष्णु ने कहा कि उन्होंने किसान के खेत में चोरी की है और अब इन्हें 12 साल तक किसान की सेवा करनी होगी। तब मां लक्ष्मी गरीब किसान के घर पहुंची और वहां रहने लगीं। एक दिन किसान की पत्नी को मां लक्ष्मी ने उनकी प्रतिमा का पूजन करने को कहा। किसान की पत्नी ने वैसा ही किया। ऐसा करते ही उनके घर में धन धान्य भरने लगे और जीवन बहुत सुखी हो गया।

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