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250 करोड़ की साइबर ठगी. इस ठगी में बैंककर्मी भी शामिल.ठगी के नेटवर्क के तार चीन, अरब, देशों तक जुड़े।

 

भास्कर टुडे

  • 250 करोड़ की साइबर ठगी: चीन से लेकर सऊदी अरब तक नेटवर्क, इसमें बैंक भी कर्मी शामिल, शहर बदल निकालते हैं ।

उत्तर प्रदेश/ मुरादाबाद। मुरादाबाद पुलिस ने बताया कि टेलीग्राम एप्लीकेशन से 250 करोड़ की साइबर ठगी करने का मुख्य आरोपी दुबई में बैठा है। उसके इशारे पर ही गुजरात के दो लोगों ने गिरोह में अन्य लोगों को शामिल किया था। पकड़े गए दोनों आरोपियों ने बताया कि गिरोह में बैंक कर्मी भी शामिल हैं।

ठगी के आरोपी और जानकारी देते एसपी क्राइम सुभाष गंगवार –

टेलीग्राम एप्लीकेशन के जरिए अब तक 250 करोड़ की साइबर ठगी की वारदात को अंजाम देने वाले गिरोह का सरगना समद शेख दुबई में बैठा है।

वह दुबई से ही गिरोह को आपरेट कर रहा है। उसके इशारे पर ही विपुल शाह और नीलेश ने गिरोह में अन्य लोगों को शामिल किया था।साइबर ठगों का कारोबार चीन से लेकर सऊदी अरब और कई देशों तक फैला हुआ है।

एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क चीन से लेकर सऊदी अरब तक फैला है ।पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि गिरोह के सरगना समद शेख ने चीन के आईपी एड्रेस से सऊदी अरब में एप तैयार कराए हैं।

 

समद शेख ने ही विपुल शाह और नीलेश से संपर्क किया था। उसने ही लाखों रुपये कमाने का तरीका दोनों को समझाया था।

विपुल शाह और नीलेश के तैयार होने पर समद शेख ने दोनों को मोटी रकम भेजी। इसके बाद गिरोह खड़ा करने के निर्देश दिए थे।

इसके बाद गिरोह ने गुजरात के अहमदाबाद में अपना एक दफ्तर तैयार किया।

वहां युवकों को नौकरी पर रखा और उन्हें देश के अलग अलग शहरों से लोगों को एप के जरिए जोड़ना शुरू कर दिया था। इसके बाद साइबर ठगों ने लोगों को झांसा देकर रकम मंगवानी शुरू कर दी थी।

 

जिन खातों में ठगी की रकम जा रही है। उनमें से साइबर ठग प्रति दिन बैंकों से करीब 40 से 48 लाख रुपये निकाल रहे थे। बैंक से रुपये निकालकर बाहर आकर मिलन, राना अर्जुन, निलेश व विपुल एवं समद नाम के व्यक्ति को देते थे।

समस्त प्रकरण में सभी को अपना- अपना कमीशन रितेश के कार्यालय से दिया जाता था।

बैंक कर्मचारी और अधिकारी भी शामिल

पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि इस गिरोह के कुछ लोग लोगों के खाते खुलवाने में बैंक कर्मचारी और अधिकारियों की मदद लेते हैं। उन्हें भी कुछ हिस्सा दिया जाता है।

जिस कारण वह खाते खोलने में कोई दिक्कत नहीं करते हैं।

गरीब लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर उनसे दस्तावेज ले लेते हैं।

जिसके जरिए गिरोह के सदस्य अपूर्व, कैतुल और मनोज बैंकों में जाकर खाते खुलवाते थे। बैंक में सेटिंग से वेरिफिकेशन भी करा लेते थे।

 

 

चेक पर पहले ही करा लेते हैं हस्ताक्षर

आरोपियों के कुछ लोग पासबुक के चेक निकालकर खाता धारक से हस्ताक्षर करा लेते हैं।

खाते में जैसे ही रकम पहुंचती है। चेक लगाकर रकम निकाल ली जाती है। जिस लोगों के खाते हैं होते हैं.

 

वह दूर दराज के लोग होते हैं। जबकि जिनके साथ ठगी होती है। वह भी दूर दराज के लोग हैं।

 

विपुल शाह और नीलेश ने अन्य सदस्यों को अलग अलग काम बांट रखे हैं।

 

सादरिया मिलन लोगों के पैन कार्ड, आधार कार्ड का इस्तेमाल करके एमएसएमई फर्म का लाइसेंस लेता था। इसके बाद वो एपीएमसी का लाइसेंस लेता था। इन लाइसेंस की मदद से साइबर ठगों का बैंक से कैश निकालकर टीडीएस फ्री हो जाता था। -सुभाष चंद्र गंगवार, एसपी क्राइम

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