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15 दिन में 50 फीसदी तक बढ़े प्याज के दाम, सरकारी खरीद तेज नहीं हुई तो बिगड़ सकते हैं हालात।

 

 

भास्कर टुडे

  • दो हफ्ते में 50 फीसदी तक बढ़े प्याज के दाम, सरकारी खरीद तेज नहीं हुई तो बिगड़ सकते हैं हालात।

वैसे तो प्याज के नाम से सरकारें सहम सी जाती है। प्याज की महगाई का मुद्दा हमेशा से सुर्खियों में रहता है क्योंकि ये सीधे आपकी किचिन को प्रभावित करता है अगर एक्सपर्ट की माने तो ..

एक्सपर्ट का कहना है कि प्याज की कीमत में इस उछाल के पीछे मुख्य कारण मांग और आपूर्ति के बीच असमानता है. बागवानी उत्पाद निर्यातक संघ के प्रमुख अजीत शाह के अनुसार, किसानों और स्टॉकिस्टों को उम्मीद है कि सरकार निर्यात शुल्क समाप्त कर देगी.

अचानक मार्केट में प्याज हुआ महंगा.

बकरीद से पहले प्याज की मांग बढ़ने के कारण पिछले दो सप्ताह में इसकी कीमतों में लगभग 30 से 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे आम जनता के किचन का बजट बिगड़ गया है.

उम्मीद है कि केंद्र सरकार बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कुछ कदम उठा सकती है.

वहीं, कहा जा रहा है कि व्यापारियों ने प्याज के स्टॉक को जमा करना शुरू कर दिया है। इससे भी मार्केट में प्याज की किल्लत हो गई है।

 

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, नासिक की एक मंडी में, सोमवार को एक किलो प्याज़ का होलसेल प्राइस 26 रुपये प्रति किलोग्राम था. यह कीमत 25 मई को दर्ज की गई 17 रुपये प्रति किलोग्राम से काफी अधिक थी.

 

दूसरी ओर, महाराष्ट्र के कई थोक बाजारों में उच्च गुणवत्ता वाले प्याज़ अब 30 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की कीमत पर बिक रहे हैं.

ये हाई क्वालिटी वाले प्याज़ उच्च कीमत वाले हैं, भले ही कुल प्याज के व्यापार में इनका एक छोटा हिस्सा हों।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट जाने ..

वहीं, एक्सपर्ट का कहना है कि प्याज की कीमत में इस उछाल के पीछे मुख्य कारण मांग और आपूर्ति के बीच असमानता है.

 

ऐसे में सरकार को प्याज की सरकारी खरीद में तेजी लानी चाहिए. नहीं तो हालात और बिगड़ सकते हैं.

 

बागवानी उत्पाद निर्यातक संघ के प्रमुख अजीत शाह के अनुसार, किसानों और स्टॉकिस्टों को उम्मीद है कि सरकार निर्यात शुल्क समाप्त कर देगी.

 

कीमतों में बढ़ोतरी का एक मुख्य कारण यह है कि किसान और स्टॉकिस्ट को उम्मीद है कि केंद्र सरकार निर्यात शुल्क हटा सकती है.

 

शाह ने कहा कि इस धारणा के आधार पर, वे कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद में प्याज को रोके हुए हैं.

घरेलू स्तर पर प्याज की बढ़ी मांग..

प्याज किसानों और डीलरों द्वारा रखे गए स्टॉक से आपूर्ति की जाती है और जून से बाजारों में आ जाती है।

साल 2023-2024 के लिए रबी की फसल में अनुमानित गिरावट के चलते उच्च कीमतों की उम्मीद के कारण, किसान अपने स्टॉक से बेचने में संकोच कर रहे हैं।

40 फीसदी निर्यात शुल्क के कारण धीमी निर्यात के बावजूद घरेलू स्तर पर प्याज की उच्च मांग बनी हुई है।

खासकर 17 जून को बकरीद के करीब आने पर प्याज की मांग और बढ़ गई है।

महाराष्ट्र के नासिक के एक प्याज व्यापारी विकास सिंह ने ईटी को बताया कि महाराष्ट्र के प्याज की दक्षिणी राज्यों में मजबूत मांग है.

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