HomeBreaking Newsहरियाली पर चल रहा है लकड़ी माफियाओं का आरा

हरियाली पर चल रहा है लकड़ी माफियाओं का आरा

पवन पाराशर , जिला संवाददाता

हापुड़। जन-जन की है यहीं पुकार, पेड़ लगाकर करो धरती का श्रंगार। इस प्रकार के स्लोगन आपको जगह-जगह लिखे मिल जाएगें किन्तु कभी किसी ने सोचने का प्रयास किया कि पेड़ हमारे जीवन का कितना बड़ा हिस्सा है। पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने में पेड़ हमारी कितनी मदद करते हैं। इसके विपरीत चाँदी की चकाचौंध ध में अंधे कुछ लोग अंधाधुंध हरियाले पेड़ों की कटाई कराने में लगे हुऐ हैं। लकड़ी माफियाओं के द्वारा हरे-भरे बाग के बाग उजाड़े जा रहे हैं। वन विभाग अधिकारियों को कानो-कान खबर तक नहीं लग रही है कि लकड़ी माफियाओं का आरा किसके बाग पर चल रहा है। या यूं समझ लीजिए कि बिना विभाग की मिलीभगत के कोई अवेध कार्य नहीं होता। स्थानीय पुलिस भी इसके लिए कम दोषी नहीं होती, उसे पल-पल की जानकारी होती है कि उसके थाना क्षेत्र में क्या गुल खिलाए जा रहें हैं। वन तथा बाग पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने में पेड़ हमारी मदद करते हैं। आज जिस प्रकार से अंधाधुंध हरियाले पेड़ों की कटाई हो रही है उससे साफ जाहिर है कि हम लगातार विनाश की ओर कदम बढ़ाते जा रहे हैं। ऐसा ही नजारा पहल टूड़े के वरिष्ठ संवाददाता कुचेसर रोड के पास स्थित गाँव शाहपुर के सामने हो रही प्लाटिंग के दौरान देखा। प्लाटिंग से पूर्व यहाँ काफी संख्या में हरे-भरे पेड़ थे। प्लाटिंग करने वालों ने लकड़ी माफियाओं से सांठ-गांठ करके रातों-रात तमाम पेड़ों को कटवा डाला। यहाँ तक कि वन विभाग के अधिकारियों को कानो-कान खबर तक नहीं लग सकी। जानकारी में आया है कि इस घटना की जानकारी कोतवाली बाबूगढ़ पुलिस को थी किन्तु लकड़ी माफियाओं से सांठ-गांठ होने के कारण पूरे मामले को दबा दिया गया।

ठीक ऐसा ही मामला गाँव उपेड़ा के पास देखने को मिला था। यहां गढ़मुक्तेश्वर की ओर जाने वाले रास्ट्रीय राजमार्ग के किनारे करीब 50 बीघा में आम के पेड़ों का हरा-भरा बाग था। बाग की रखवाली के लिए एक परिवार ने वहाँ झोपड़ी तक डाल रखी थी। यह बाग भी एक माह पूर्व रातों-रात काट दिया गया था। यह गाँव भी कोतवाली बाबूगढ़ क्षेत्र के अंतर्गत आता है। जब पूरे मामले की जानकारी वन विभाग के क्षेत्राधिकारी से ली गई तो उन्होने मामले की जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया। साथ ही कहा कि गंभीरता से जांच कराई जाएगी लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। तीसरा मामला थाना सिम्भावली क्षेत्र के गाँव सिखेड़ा के पास प्रकाश में आया था। यहां पर भी एक बाग पर लकड़ी माफियाओं का आरा रातों-रात चल गया था। माफियाओं ने सांठ-गांठ करके रातों-रात तमाम हरे आम के पेड़ों को कटवा डाला था। जबकि फलदार पेड़ों का कटान पूरी तरह प्रतिबंधित है।

सभी जानते हैं कि सीओटू ग्रीन हाउस गैस के रूप में काम करती और सूर्य की गर्मी को रोक लेती है। आज धरती के तापमान को बढ़ाने में ’ग्रीन हाउस गैस’ ही मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं। मौसम में आए बदलावों के लिए भी यही कारण है। गर्मी बढ़ने, बेमौसम बरसात, सूखे और बाढ़ का प्रकोप और सर्दी के मौसम में ठंड बढ़ने के लिए भी यही गैस जिम्मेदार है। इन बदलावों का असर मनुष्य सहित पेड़ पौधों व पृथ्वी पर मौजूद सभी जीवों पर भी हो रहा है। यह गैस जिस खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है उसे रोकने का कारगर उपाय एक ही है ‘कार्बन-न्यूट्रल’ बनना। इसके लिए जरूरी है कि अपने कार्बन फुटप्रिंट को पूरी तरह से मिटाने की कोशिश की जाए जैसे पेड़ लगाएं, उनकी देखभाल करें ताकि अपने द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड को सोख ले।

 

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