HomeNationalसुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड स्कीम पर फौरन रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड स्कीम पर फौरन रोक लगाई

नई दिल्‍ली। लोकसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को बहुत बड़ा झटका दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की गुमनाम चुनावी बॉन्ड स्कीम पर फौरन रोक लगा दी है। भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने केंद्र सरकार की चुनावी बॉन्ड स्कीम की कानूनी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सर्वसम्मत से यह फैसला सुनाया है।

सीजेआई ने कहा कि, चुनावी बॉन्ड स्कीम अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत सूचना के अधिकार का उल्लंघन है और अंसवैधानिक है. इसलिए चुनावी बॉन्ड स्कीम तत्काल प्रभाव से रोकी जा रही है और रद्द की जा रही है। बता दें कि, 2017 में केंद्र सरकार ने चुनावी बॉन्ड स्कीम को फाइनेंस बिल के जरिए संसद में पेश किया था। संसद से पास होने के बाद 29 जनवरी 2018 को चुनावी बॉन्ड स्कीम का नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। इसके जरिए राजनीतिक दलों को गुप्त और गुमनाम रूप से चुनावी चंदा मिल रहा था।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि, किस राजनीतिक दल को कहां से कितना चुनावी चंदा मिल रहा है। इसकी जानकारी जनता को भी दी जानी चाहिए। क्योंकि वोट डालने वाली जनता को यह जानने पूरा हक है कि राजनीतिक दलों को किसने कितना चंदा दिया है। लेकिन गुमनाम चुनावी बॉन्ड स्कीम ऐसा होने नहीं देती है। सीजेआई ने कहा कि, अगर यह कहा जा रहा है कि चुनाव में काले धन पर अंकुश लगाने के लिए गुमनाम चुनावी बॉन्ड स्कीम लाई गई है तो क्या यह जायज है कि काले धन पर अंकुश लगाने के लिए सूचना के अधिकार का उल्लंघन किया जाये। यह उचित नहीं है। चुनावी बांड स्कीम काले धन पर अंकुश लगाने वाली एकमात्र योजना नहीं हो सकती है। बल्कि चुनावी बांड स्कीम के गुप्त होने पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए चुनावी चंदे के अन्य विकल्प भी हैं।

सीजेआई का कहना था कि सभी राजनीतिक योगदान सार्वजनिक नीति को बदलने के इरादे से नहीं किए जाते हैं। राजनीतिक दलों को वित्तीय योगदान दो पक्षों के लिए दिया जाता है या तो राजनीतिक दल को समर्थन देने के लिए, या योगदान बदले की भावना से। सीजेआई ने कहा कि चुनावी बांड के माध्यम से कंपनी-कॉर्पोरेट से मिल रहे असीमित योगदान के बारे में खुलासा किया जाना चाहिए क्योंकि कंपनियों द्वारा दान पूरी तरह से बदले के उद्देश्य से है और अपने स्वार्थ से हो सकता है। सीजेआई ने कहा कि, सूचना के अधिकार की व्यवस्था राजनीतिक योगदान पर भी लागू होती है. इसलिए राजनीतिक दलों की फंडिंग के बारे में जानकारी आवश्यक है। ऐसा नहीं होने पर चुनावी बांड योजना असंवैधानिक है और RTI का उल्लंघन कर रही है। यह स्कीम रद्द करनी होगी। उन्‍होंने SBI बैंक को आदेश दिया है कि, वह अब आगे चुनावी बॉन्ड जारी न करे।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments