HomeNationalब्रम्हलीन हुए जैन समाज के शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज

ब्रम्हलीन हुए जैन समाज के शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज

रायपुर। जैन समाज के शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज आज ब्रह्मलीन हो गए। स्वेच्छा से रात उन्होंने 2 बजकर 30 मिनट पर देह त्याग दी। आचार्य श्री विद्यासागर महाराज ने छत्तीसगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ पर अंतिम सांस ली।

जैन मुनि विद्यासागर पिछले तीन दिनों से कठोर उपवास पर थे और उन्होंने अन्न-पानी सब त्याग दिया था। उन्होंने मौन व्रत भी धारण कर रखा था। जैन समुदाय के रत्न कहे जाने वाले आचार्य विद्यासागर का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा के दिन कर्नाटक के सदलगा गांव में हुआ था। जानकारी के अनुसार, आचार्य विद्यासागर, आचार्य ज्ञानसागर के शिष्य थे।

आज डोंगरगढ़ में होगा अंतिम संस्कार: जैन धर्म के प्रमुख संत आचार्य विद्यासागर जी महाराज जैन धर्म के प्रमुख आचार्यों में से एक थे। जैन मुनि आचार्य श्री के शरीर त्यागने की खबर मिलते ही जैन समाज के अनुयायी बड़ी संख्या में डोंगरगढ़ में जुट रहे हैं। आज रविवार को डोला चंद्रगिरी तीर्थ डोंगरगढ़ में दोपहर लगभग 1 बजे उनकी अंतिम संस्कार विधि होगी। सल्लेखना के अंतिम समय बड़ी संख्या में जैन मुनि और समाज के लोगों की मौजूदगी में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन धर्म मौजूद रहेंगे।

पिछले साल छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2023 के कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डोंगरगढ़ पहुंचे थे। इस दौरान पीएम मोदी ने भी जैन मुनि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से मुलाकात की थी। पीएम मोदी ने विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए उनका आशीर्वाद दिया था। इस मुलाकात की फोटो उन्होंने सोशल मीडिया साइड में भी डाली थी।

सीएम विष्णु देव साय ने किया नमन: जैन मुनि आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के समाधि लेने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नमन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “विश्व वंदनीय, राष्ट्र संत आचार्य श्री विद्यासागर महामुनिराज जी के डोंगरगढ़ स्थित चंद्रगिरी तीर्थ में सल्लेखना पूर्वक समाधि का समाचार प्राप्त हुआ। छत्तीसगढ़ सहित देश-दुनिया को अपने ओजस्वी ज्ञान से पल्लवित करने वाले आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज को देश व समाज के लिए किए गए उल्लेखनीय कार्य, उनके त्याग और तपस्या के लिए युगों-युगों तक स्मरण किया जाएगा। आध्यात्मिक चेतना के पुंज आचार्य श्री विद्यासागर जी के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन।

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