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अपने समय के यथार्थ से टकराने वाले कवि हैं श्रीप्रकाश शुक्ल : मदन कश्यप

अलीगढ़ । राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खैर में समकालीन हिंदी कविता के महत्वपूर्ण कवि श्रीप्रकाश शुक्ल के कवि कर्म पर प्रतिष्ठित आलोचक कमलेश वर्मा व सुचिता वर्मा द्वारा संपादित पुस्तक ’’असहमतियों के वैभव के कवि: श्रीप्रकाश शुक्ल’’ के लोकार्पण व परिचर्चा का कार्यक्रम 03 अप्रैल को आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो.चन्द्रवीर सिंह ने की एवं मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ कवि मदन कश्यप जी उपस्थित रहे।

अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो.चन्द्रवीर सिंह ने कहा कि 1990 के बाद की पीढ़ी को श्रीप्रकाश शुक्ल ने एक नया मुहावरा दिया और पुस्तक में सभी आलोचकों ने विवेकपूर्ण ढंग से श्रीप्रकाश शुक्ल के विराट कवि व्यक्तित्व को परखा है।

मुख्य अतिथि एवं समकालीन हिंदी कविता के वरिष्ठ और महत्वपूर्ण कवि मदन कश्यप ने कहा कि सृजन का असहमति से बेहद ही गहरा रिश्ता होता है, जहाँ कवि असहमत होता है उसे वह अपनी सृजनशक्ति के माध्यम से जनसमाज के पक्ष की संवेदना में बदल देता है।   मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए प्रो. शफी किदवई ने कहा कि श्रीप्रकाश शुक्ल की कविता सत्ता के उस साजिश के खिलाफ संघर्ष करती है जो बहुलतावादी संस्कृति के खिलाफ एकरूपता की हिमायत करती है।

श्रीप्रकाश शुक्ल ने अपने आत्मवक्तव्य में कहा कि साहित्य बुनियादी तौर पर असहमतियों का पोषण करता है तथा वैकल्पिक सत्ता के निर्माण की कोशिश करता है।  कार्यक्रम का संचालन डॉ. जगन्नाथ दुबे ने किया तथा स्वागत वक्तव्य प्रो.एम. पी. सिंह ने दिया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. निधि ने किया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के तमाम प्राध्यापकों तथा काशी हिन्दू विश्वविद्यालय तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भारी संख्या में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति रही।  द्वितीय सत्र में काव्यपाठ का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि मदन कश्यप ने की तथा श्रीप्रकाश शुक्ल, राकेशरेणु, विंध्याचल यादव, प्रियंका शर्मा, आशीष तिवारी, सुनील चौधरी, राजा सिंह, चंचल सारस्वत ने काव्यपाठ किया। सत्र का संचालन शुभम चतुर्वेदी ने किया।

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